बुधवार, 24 मार्च 2021

चुनाव_आयोग_के_नाम_खुला_प्रार्थना_पत्र

सेवा में,

         श्रीमान मुख्य निर्वाचन अधिकारी,

         चुनाव आयोग जयपुर,

         राजस्थान।


विषय :  प्रदेश में कोरोना रोकथाम चुनाव करवाने बाबत ।


महोदय जी,

                उपरोक्त विषय अंर्तगत निवेदन है कि राजस्थान प्रदेश में कोरोना फेल रहा है, जिससे सरकार भयभीत होकर रात्रि कर्फ्यू लगाने को विवश है, साथ ही प्रदेश की जनता में डर है कि कहीं लॉकडाउन लगने से होली का त्योंहार कोराेना को बलि न चढ़ जाए ।

          अतःआपसे निवेदन है कि प्रदेश में जल्द से जल्द चुनाव कराने की घोषणा करें । बड़े बड़े नेताओं को भेज कर प्रतिदिन रैलियां आयोजित करवाए । इससे लाखों की संख्या में भीड़ इक्ठी होगी तथा कोरोना भीड़ को देखते ही डर जायेगा और तुरंत प्रदेश छोड़कर भाग भाएगा ।

          उदाहरण के रूप में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरल, असम व पुंडुचेरी में चुनाव के कारण कोरोना इन क्षेत्रों में जाने से मना कर रहा है ।

          अतः आप से पुनः निवेदन है कि प्रदेश में अतिशीघ्र चुनाव करवाने की कृपा करें ।

                                                          भवदीय

                                                   समस्त प्रदेशवासी 

                                                         राजस्थान


रविवार, 24 फ़रवरी 2019

संभल जा अब भी हुई देर नहीं


हर एक जरे के बाद महसूस होती है अकेलेपन की
हर उस वक्त में खलती है,  कमी अपनेपन की
एक रोज तेरी यादें संजोया करते
अब हर रोज तेरी यादें भुलाया करेंगे
मुश्किल तो होगा बीना रहना तेरे
अब से इस दिल को बहलाया करेंगे
जीना दुश्वार तो होगा बीना तेरी यादों के
अब इसे संभलना होगा बीना किसी बहानो के
इतना भी नहीं अदृश्य चेहरा तेरा
समझ ना सके जो यह मन मेरा
संभल जा अब भी हुई देर नहीं
रोयेगा उस दिन ठोकर खाकर कही

तेरे पैरों की आहट


सुन कर तेरे पैरों की आहट चेहरे पर रंगत आ जाती है
कुछ देर बाद जब तुँ ना दिखे तो फिर से मायूसी छा जाती है
क्यों यह उदासियाँ चेहरे से जाती नहीं
क्यों अब बगैर तेरे रहा जाता नहीं
जब जब रहना चाहता हूँ बगैर तेरे
तब तब होश उड़ जाते हैं मेर

जाने कहाँ छुपी है तूंँ



जाने कहाँ छुपी है तूँ
तेरी हर एक याद साँसो में बसाये रखी है
तेरी सुरत अब तक दिल में छुपाये रखी है
जाने कहाँ छुपी है तूँ

जाने कहाँ छुपी है तूँ
तुम्हें पाने की हर वक्त ललक रहती है
अब तो हर किसी में तूँ ही दिखती है
जाने कहाँ छुपी है तूँ

जाने कहाँ छुपी है तूँ
मेरी चाहत को यूँ नजर अंदाज ना करना
एक बार आकर मुझे अपनी बाँहों में भर लेना
जाने कहाँ छुपी है तूँ

जाने कहाँ छुपी है तूँ
मेरी महोबत को तूँ ठुकरा ना देना
साथ बिताये लम्हे भुला ना देना
जाने कहाँ छुपी है तूंँ

गुरुवार, 14 फ़रवरी 2019




बदला ले कौन किस से ? अपने ही अपनों पर घात लगाए बैठे हैं
पहचाने दुश्मन को कोई कैसे?  अपने ही अपने घरों में छुपाये बैठे हैं
मारे दुश्मन को तो कैसे  ? अपने ही देश के गद्दार इन्हें बचाने बैठे हैं
कोई कैसे रोके इन घटनाओं को ? अपने ही कुछ न मिटने वाली गलतियाँ कर बैठे हैं

भारत माता के वीर शहीदों को सत सत नमन 

मंगलवार, 12 फ़रवरी 2019



हमसे इश्क की गहराई ना पूछो सनम
मापलो सागर की गहराई तो जानो
उसमें डूब जाओ तो समझो

गुरुवार, 3 जनवरी 2019


तुँ कैड़ी छः उळझण, सब फिर-घिर थामें धंसे छः
थारो नाम रख दुँ नागण, तुँ जवानी सब ने डंसे छः